श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.9

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यत्र भागवती वार्ता तत्र भक्‍त्यादिकं व्रजेत्।

कथाशब्दं समाकर्ण्य तत्त्रिकं तरुणायते॥ ९

yatra bhāgavatī vārtā tatra bhaktyādikaṃ vrajet|

kathāśabdaṃ samākarṇya tattrikaṃ taruṇāyate|| 9

अर्थ

क्योंकि जहाँ भी श्रीमद्भागवतकी कथा होती है वहाँ ये भक्ति आदि अपने-आप पहुँच जाते हैं। वहाँ कानोंमें कथाके शब्द पड़नेसे ये तीनों तरुण हो जायँगे॥ ९॥

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