sā tvaṃ ca tiṣṭhasva sudhairyasaṃśrayā nirantaraṃ vaiṣṇavamānasāni|| 71
अर्थ
‘तुम भक्तोंको भगवान्का स्वरूप प्रदान करनेवाली, अनन्यप्रेमका सम्पादन करनेवाली और संसाररोगको निर्मूल करनेवाली हो; अतः तुम धैर्य धारण करके नित्य-निरन्तर विष्णुभक्तोंके हृदयोंमें ही निवास करो॥ ७१॥✎ 1568
भक्तेषु गोविन्दस्वरूपकर्त्री प्रेमैकधर्त्री भवरोगहन्त्री।
सा त्वं च तिष्ठस्व सुधैर्यसंश्रया निरन्तरं वैष्णवमानसानि॥ ७१
‘तुम भक्तोंको भगवान्का स्वरूप प्रदान करनेवाली, अनन्यप्रेमका सम्पादन करनेवाली और संसाररोगको निर्मूल करनेवाली हो; अतः तुम धैर्य धारण करके नित्य-निरन्तर विष्णुभक्तोंके हृदयोंमें ही निवास करो॥ ७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.71 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 53) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/71/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)