ये कलियुगके दोष भले ही सारे संसारपर अपना प्रभाव डालें, किन्तु वहाँ तुमपर इनकी दृष्टि भी नहीं पड़ सकेगी।’ इस प्रकार उनकी आज्ञा पाते ही भक्ति तुरन्त भगवद्भक्तोंके हृदयोंमें जा विराजीं॥ ७२॥✎ 1568
ततोऽपि दोषाः कलिजा इमे त्वां द्रष्टुं न शक्ताः प्रभवोऽपि लोके।
एवं तदाज्ञावसरेऽपि भक्तिस्तदा निषण्णा हरिदासचित्ते॥ ७२
ये कलियुगके दोष भले ही सारे संसारपर अपना प्रभाव डालें, किन्तु वहाँ तुमपर इनकी दृष्टि भी नहीं पड़ सकेगी।’ इस प्रकार उनकी आज्ञा पाते ही भक्ति तुरन्त भगवद्भक्तोंके हृदयोंमें जा विराजीं॥ ७२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.72 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 53) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/72/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)