श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.11

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कुमारा ऊचुः

ये मानवाः पापकृतस्तु सर्वदा सदा दुराचाररता विमार्गगाः।

क्रोधाग्‍निदग्धाः कुटिलाश्‍च कामिनः सप्ताहयज्ञेन कलौ पुनन्ति ते॥ ११

ye mānavāḥ pāpakṛtastu sarvadā sadā durācāraratā vimārgagāḥ|

krodhāgnidagdhāḥ kuṭilāśca kāminaḥ saptāhayajñena kalau punanti te|| 11

अर्थ

सनकादिने कहा—जो लोग सदा तरह-तरहके पाप किया करते हैं, निरन्तर दुराचारमें ही तत्पर रहते हैं और उलटे मार्गोंसे चलते हैं तथा जो क्रोधाग्‍निसे जलते रहनेवाले कुटिल और कामपरायण हैं, वे सभी इस कलियुगमें सप्ताहयज्ञसे पवित्र हो जाते हैं॥ ११॥

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