श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.18

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

भिक्षुको वित्तवाल्‍ँलोके तत्प्रिया धुन्धुली स्मृता।

स्ववाक्यस्थापिका नित्यं सुन्दरी सुकुलोद्भवा॥ १८

bhikṣuko vittavālm̐loke tatpriyā dhundhulī smṛtā|

svavākyasthāpikā nityaṃ sundarī sukulodbhavā|| 18

अर्थ

वह धनी होनेपर भी भिक्षाजीवी था। उसकी प्यारी पत्‍नी धुन्धुली कुलीन एवं सुन्दरी होनेपर भी सदा अपनी बातपर अड़ जानेवाली थी॥ १८॥

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