श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

लोकवार्तारता क्रूरा प्रायशो बहुजल्पिका।

शूरा च गृहकृत्येषु कृपणा कलहप्रिया॥ १९

lokavārtāratā krūrā prāyaśo bahujalpikā|

śūrā ca gṛhakṛtyeṣu kṛpaṇā kalahapriyā|| 19

अर्थ

उसे लोगोंकी बात करनेमें सुख मिलता था। स्वभाव था क्रूर। प्रायः कुछ-न-कुछ बकवाद करती रहती थी। गृहकार्यमें निपुण थी, कृपण थी और थी झगड़ालू भी॥ १९॥

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