श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एकदा स द्विजो दुःखाद् गृहं त्यक्‍त्वा वनं गतः।

मध्याह्ने तृषितो जातस्तडागं समुपेयिवान्॥ २३

ekadā sa dvijo duḥkhād gṛhaṃ tyaktvā vanaṃ gataḥ|

madhyāhne tṛṣito jātastaḍāgaṃ samupeyivān|| 23

अर्थ

एक दिन वह ब्राह्मणदेवता बहुत दुःखी होकर घरसे निकलकर वनको चल दिया। दोपहरके समय उसे प्यास लगी, इसलिये वह एक तालाबपर आया॥ २३॥

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