श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.24

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

पीत्वा जलं निषण्णस्तु प्रजादुःखेन कर्शितः।

मुहूर्तादपि तत्रैव संन्यासी कश्चिदागतः॥ २४

pītvā jalaṃ niṣaṇṇastu prajāduḥkhena karśitaḥ|

muhūrtādapi tatraiva saṃnyāsī kaścidāgataḥ|| 24

अर्थ

सन्तानके अभावके दुःखने उसके शरीरको बहुत सुखा दिया था, इसलिये थक जानेके कारण जल पीकर वह वहीं बैठ गया। दो घड़ी बीतनेपर वहाँ एक संन्यासी महात्मा आये॥ २४॥

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