श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.32

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इत्युक्‍त्वा स रुरोदोच्चैस्तत्पार्श्वं दुःखपीडितः।

तदा तस्य यतेश्चित्ते करुणाभूद्गरीयसी॥ ३२

ityuktvā sa rurodoccaistatpārśvaṃ duḥkhapīḍitaḥ|

tadā tasya yateścitte karuṇābhūdgarīyasī|| 32

अर्थ

यों कहकर वह ब्राह्मण दुःखसे व्याकुल हो उन संन्यासी महात्माके पास फूट-फूटकर रोने लगा। तब उन यतिवरके हृदयमें बड़ी करुणा उत्पन्‍न हुई॥ ३२॥

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