वे योगनिष्ठ थे; उन्होंने उसके ललाटकी रेखाएँ देखकर सारा वृत्तान्त जान लिया और फिर उसे विस्तारपूर्वक कहने लगे॥ ३३॥
तद्भालाक्षरमालां च वाचयामास योगवान्।
सर्वं ज्ञात्वा यतिः पश्चाद्विप्रमूचे सविस्तरम्॥ ३३
वे योगनिष्ठ थे; उन्होंने उसके ललाटकी रेखाएँ देखकर सारा वृत्तान्त जान लिया और फिर उसे विस्तारपूर्वक कहने लगे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/33/