विप्रवर! सुनो; मैंने इस समय तुम्हारा प्रारब्ध देखकर निश्चय किया है कि सात जन्मतक तुम्हारे कोई सन्तान किसी प्रकार नहीं हो सकती॥ ३५॥
शृणु विप्र मया तेऽद्य प्रारब्धं तु विलोकितम्।
सप्तजन्मावधि तव पुत्रो नैव च नैव च॥ ३५
विप्रवर! सुनो; मैंने इस समय तुम्हारा प्रारब्ध देखकर निश्चय किया है कि सात जन्मतक तुम्हारे कोई सन्तान किसी प्रकार नहीं हो सकती॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/35/