श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

संततेः सगरो दुःखमवापाङ्गः पुरा तथा।

रे मुञ्चाद्य कुटुम्बाशां संन्यासे सर्वथा सुखम्॥ ३६

saṃtateḥ sagaro duḥkhamavāpāṅgaḥ purā tathā|

re muñcādya kuṭumbāśāṃ saṃnyāse sarvathā sukham|| 36

अर्थ

पूर्वकालमें राजा सगर एवं अंगको सन्तानके कारण दुःख भोगना पड़ा था। ब्राह्मण! अब तुम कुटुम्बकी आशा छोड़ दो। संन्यासमें ही सब प्रकारका सुख है॥ ३६॥

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