श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.48

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मन्दायां मयि सर्वस्वं ननान्दा संहरेत्तदा।

सत्यशौचादिनियमो दुराराध्यः स दृश्यते॥ ४८

mandāyāṃ mayi sarvasvaṃ nanāndā saṃharettadā|

satyaśaucādiniyamo durārādhyaḥ sa dṛśyate|| 48

अर्थ

मैं जब दुर्बल पड़ जाऊँगी, तब ननदरानी आकर घरका सब माल-मता समेट ले जायँगी। और मुझसे तो सत्य-शौचादि नियमोंका पालन होना भी कठिन ही जान पड़ता है॥ ४८॥

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