॥ श्रीहरिः ॥
तदानीं तु समागत्य गोकर्णो ज्ञानसंयुतः।
बोधयामास जनकं वैराग्यं परिदर्शयन्॥ ७३
tadānīṃ tu samāgatya gokarṇo jñānasaṃyutaḥ|
bodhayāmāsa janakaṃ vairāgyaṃ paridarśayan|| 73
अर्थ
उसी समय परम ज्ञानी गोकर्णजी वहाँ आये और उन्होंने पिताको वैराग्यका उपदेश करते हुए बहुत समझाया॥ ७३॥
तदानीं तु समागत्य गोकर्णो ज्ञानसंयुतः।
बोधयामास जनकं वैराग्यं परिदर्शयन्॥ ७३
उसी समय परम ज्ञानी गोकर्णजी वहाँ आये और उन्होंने पिताको वैराग्यका उपदेश करते हुए बहुत समझाया॥ ७३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.73 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 61) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/73/