श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.13

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

लोकैः पृष्टा वदन्ति स्म दूरं यातः प्रियो हि नः।

आगमिष्यति वर्षेऽस्मिन् वित्तलोभविकर्षितः॥ १३

lokaiḥ pṛṣṭā vadanti sma dūraṃ yātaḥ priyo hi naḥ|

āgamiṣyati varṣe'smin vittalobhavikarṣitaḥ|| 13

अर्थ

लोगोंके पूछनेपर कह देती थीं कि ‘हमारे प्रियतम पैसेके लोभसे अबकी बार कहीं दूर चले गये हैं, इसी वर्षके अन्दर लौट आयेंगे’॥ १३॥

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