श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

सूत उवाच

एवं पृष्टस्तदा तेन रुरोदोच्चैः पुनः पुनः।

अशक्तो वचनोच्चारे संज्ञामात्रं चकार ह॥ २५

evaṃ pṛṣṭastadā tena rurodoccaiḥ punaḥ punaḥ|

aśakto vacanoccāre saṃjñāmātraṃ cakāra ha|| 25

अर्थ

सूतजी कहते हैं—गोकर्णके इस प्रकार पूछनेपर वह बार-बार जोर-जोरसे रोने लगा। उसमें बोलनेकी शक्ति नहीं थी, इसलिये उसने केवल संकेतमात्र किया॥ २५॥

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