तब गोकर्णने अंजलिमें जल लेकर उसे अभिमन्त्रित करके उसपर छिड़का। इससे उसके पापोंका कुछ शमन हुआ और वह इस प्रकार कहने लगा॥ २६॥
ततोऽञ्जलौ जलं कृत्वा गोकर्णस्तमुदैरयत्।
तत्सेकहतपापोऽसौ प्रवक्तुमुपचक्रमे॥ २६
तब गोकर्णने अंजलिमें जल लेकर उसे अभिमन्त्रित करके उसपर छिड़का। इससे उसके पापोंका कुछ शमन हुआ और वह इस प्रकार कहने लगा॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 64) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/26/