श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तन्मूलच्छिद्रमाविश्य श्रवणार्थं स्थितो ह्यसौ।

वातरूपी स्थितिं कर्तुमशक्तो वंशमाविशत्॥ ४६

tanmūlacchidramāviśya śravaṇārthaṃ sthito hyasau|

vātarūpī sthitiṃ kartumaśakto vaṃśamāviśat|| 46

अर्थ

उसीके नीचेके छिद्रमें घुसकर वह कथा सुननेके लिये बैठ गया। वायुरूप होनेके कारण वह बाहर कहीं बैठ नहीं सकता था, इसलिये बाँसमें घुस गया॥ ४६॥

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