श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.47

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वैष्णवं ब्राह्मणं मुख्यं श्रोतारं परिकल्प्य सः।

प्रथमस्कन्धतः स्पष्टमाख्यानं धेनुजोऽकरोत्॥ ४७

vaiṣṇavaṃ brāhmaṇaṃ mukhyaṃ śrotāraṃ parikalpya saḥ|

prathamaskandhataḥ spaṣṭamākhyānaṃ dhenujo'karot|| 47

अर्थ

गोकर्णजीने एक वैष्णव ब्राह्मणको मुख्य श्रोता बनाया और प्रथमस्कन्धसे ही स्पष्ट स्वरमें कथा सुनानी आरम्भ कर दी॥ ४७॥

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