॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.5.58
अस्थिस्तम्भं स्नायुबद्धं मांसशोणितलेपितम्।
चर्मावनद्धं दुर्गन्धं पात्रं मूत्रपुरीषयोः॥ ५८
asthistambhaṃ snāyubaddhaṃ māṃsaśoṇitalepitam|
carmāvanaddhaṃ durgandhaṃ pātraṃ mūtrapurīṣayoḥ|| 58
अर्थ
अस्थियाँ ही इस शरीरके आधारस्तम्भ हैं, नस-नाडीरूप रस्सियोंसे यह बँधा हुआ है, ऊपरसे इसपर मांस और रक्त थोपकर इसे चर्मसे मँढ़ दिया गया है। इसके प्रत्येक अंगमें दुर्गन्ध आती है; क्योंकि है तो यह मल-मूत्रका भाण्ड ही॥ ५८॥