जो लोग भागवतकी कथासे वंचित हैं, वे तो जलमें बुद्बुदे और जीवोंमें मच्छरोंके समान केवल मरनेके लिये ही पैदा होते हैं॥ ६३॥✎ 17
बुद्बुदा इव तोयेषु मशका इव जन्तुषु।
जायन्ते मरणायैव कथाश्रवणवर्जिताः॥ ६३
जो लोग भागवतकी कथासे वंचित हैं, वे तो जलमें बुद्बुदे और जीवोंमें मच्छरोंके समान केवल मरनेके लिये ही पैदा होते हैं॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 68) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/63/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)