इस लोकमें सप्ताहश्रवण करनेसे भगवान्की शीघ्र ही प्राप्ति हो सकती है। अतः सब प्रकारके दोषोंकी निवृत्तिके लिये एकमात्र यही साधन है॥ ६२॥✎ 17
सप्ताहश्रवणाल्लोके प्राप्यते निकटे हरिः।
अतो दोषनिवृत्त्यर्थमेतदेव हि साधनम्॥ ६२
इस लोकमें सप्ताहश्रवण करनेसे भगवान्की शीघ्र ही प्राप्ति हो सकती है। अतः सब प्रकारके दोषोंकी निवृत्तिके लिये एकमात्र यही साधन है॥ ६२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.62 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 68) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/62/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)