चोरीका बहुत माल देखकर रात्रिके समय स्त्रियोंने विचार किया कि ‘यह नित्य ही चोरी करता है, इसलिये इसे किसी दिन अवश्य राजा पकड़ लेगा॥ ७॥
बहुवित्तचयं दृष्ट्वा रात्रौ नार्यो व्यचारयन्।
चौर्यं करोत्यसौ नित्यमतो राजा ग्रहीष्यति॥ ७
चोरीका बहुत माल देखकर रात्रिके समय स्त्रियोंने विचार किया कि ‘यह नित्य ही चोरी करता है, इसलिये इसे किसी दिन अवश्य राजा पकड़ लेगा॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 62) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/7/