श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वित्तं हृत्वा पुनश्चैनं मारयिष्यति निश्चितम्।

अतोऽर्थगुप्तये गूढमस्माभिः किं न हन्यते॥ ८

vittaṃ hṛtvā punaścainaṃ mārayiṣyati niścitam|

ato'rthaguptaye gūḍhamasmābhiḥ kiṃ na hanyate|| 8

अर्थ

राजा यह सारा धन छीनकर इसे निश्‍चय ही प्राणदण्ड देगा। जब एक दिन इसे मरना ही है, तब हम ही धनकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे इसको क्यों न मार डालें॥ ८॥

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