श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.9

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

निहत्यैनं गृहीत्वार्थं यास्यामो यत्र कुत्रचित्।

इति ता निश्‍चयं कृत्वा सुप्तं सम्बद्ध्य रश्मिभिः॥ ९

nihatyainaṃ gṛhītvārthaṃ yāsyāmo yatra kutracit|

iti tā niścayaṃ kṛtvā suptaṃ sambaddhya raśmibhiḥ|| 9

अर्थ

इसे मारकर हम इसका माल-मता लेकर जहाँ-कहीं चली जायँगी।’ ऐसा निश्‍चय कर उन्होंने सोये हुए धुन्धुकारीको रस्सियोंसे कस दिया और उसके गलेमें फाँसी लगाकर उसे मारनेका प्रयत्न किया। इससे जब वह जल्दी न मरा तो उन्हें बड़ी चिन्ता हुई॥ ९-१०॥

यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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