॥ श्रीहरिः ॥
गोकर्ण तव गोविन्दो गोलोकं दास्यति स्वयम्।
एवमुक्त्वा ययुः सर्वे वैकुण्ठं हरिकीर्तनाः॥ ७७
gokarṇa tava govindo golokaṃ dāsyati svayam|
evamuktvā yayuḥ sarve vaikuṇṭhaṃ harikīrtanāḥ|| 77
अर्थ
और गोकर्णजी! आपको तो भगवान् स्वयं आकर गोलोकधाममें ले जायँगे। यों कहकर वे सब पार्षद हरिकीर्तन करते वैकुण्ठलोकको चले गये॥ ७७॥
गोकर्ण तव गोविन्दो गोलोकं दास्यति स्वयम्।
एवमुक्त्वा ययुः सर्वे वैकुण्ठं हरिकीर्तनाः॥ ७७
और गोकर्णजी! आपको तो भगवान् स्वयं आकर गोलोकधाममें ले जायँगे। यों कहकर वे सब पार्षद हरिकीर्तन करते वैकुण्ठलोकको चले गये॥ ७७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.77 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 69) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/77/