श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.77

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

गोकर्ण तव गोविन्दो गोलोकं दास्यति स्वयम्।

एवमुक्‍त्वा ययुः सर्वे वैकुण्ठं हरिकीर्तनाः॥ ७७

gokarṇa tava govindo golokaṃ dāsyati svayam|

evamuktvā yayuḥ sarve vaikuṇṭhaṃ harikīrtanāḥ|| 77

अर्थ

और गोकर्णजी! आपको तो भगवान् स्वयं आकर गोलोकधाममें ले जायँगे। यों कहकर वे सब पार्षद हरिकीर्तन करते वैकुण्ठलोकको चले गये॥ ७७॥

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