भगवान् स्वयं हर्षित होकर अपने पांचजन्य शंखकी ध्वनि करने लगे और उन्होंने गोकर्णको हृदयसे लगाकर अपने ही समान बना लिया॥ ८१॥
पाञ्चजन्यध्वनिं चक्रे हर्षात्तत्र स्वयं हरिः।
गोकर्णं तु समालिङ्ग्याकरोत्स्वसदृशं हरिः॥ ८१
भगवान् स्वयं हर्षित होकर अपने पांचजन्य शंखकी ध्वनि करने लगे और उन्होंने गोकर्णको हृदयसे लगाकर अपने ही समान बना लिया॥ ८१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.81 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 69) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/81/