उन्होंने क्षणभरमें ही अन्य सब श्रोताओंको भी मेघके समान श्यामवर्ण, रेशमी पीताम्बरधारी तथा किरीट और कुण्डलादिसे विभूषित कर दिया॥ ८२॥
श्रोतॄनन्यान् घनश्यामान् पीतकौशेयवाससः।
किरीटिनः कुण्डलिनस्तथा चक्रे हरिः क्षणात्॥ ८२
उन्होंने क्षणभरमें ही अन्य सब श्रोताओंको भी मेघके समान श्यामवर्ण, रेशमी पीताम्बरधारी तथा किरीट और कुण्डलादिसे विभूषित कर दिया॥ ८२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.82 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 69) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/82/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#980 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रोतृनन्यान् → श्रोतॄनन्यान्