आगेकी ओर उनके लिये वहाँ यथोचित आसन तैयार रखे। इनके पीछे वक्ताके लिये भी एक दिव्य सिंहासनका प्रबन्ध करे॥ १७॥✎ 1271
पूर्वं तेषामासनानि कर्तव्यानि यथोत्तरम्।
वक्तुश्चापि तदा दिव्यमासनं परिकल्पयेत्॥ १७
आगेकी ओर उनके लिये वहाँ यथोचित आसन तैयार रखे। इनके पीछे वक्ताके लिये भी एक दिव्य सिंहासनका प्रबन्ध करे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 72) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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