श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.18

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

उदङ्मुखो भवेद्वक्ता श्रोता वै प्राङ्मुखस्तदा।

प्राङ्मुखश्चेद्भवेद्वक्ता श्रोता चोदङ्मुखस्तदा॥ १८

udaṅmukho bhavedvaktā śrotā vai prāṅmukhastadā|

prāṅmukhaścedbhavedvaktā śrotā codaṅmukhastadā|| 18

अर्थ

यदि वक्ताका मुख उत्तरकी ओर रहे तो श्रोता पूर्वाभिमुख होकर बैठे और यदि वक्ता पूर्वाभिमुख रहे तो श्रोताको उत्तरकी ओर मुख करके बैठना चाहिये॥ १८॥✎ 1271

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