श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अनेकधर्मविभ्रान्ताः स्त्रैणाः पाखण्डवादिनः।

शुकशास्त्रकथोच्चारे त्याज्यास्ते यदि पण्डिताः॥ २१

anekadharmavibhrāntāḥ straiṇāḥ pākhaṇḍavādinaḥ|

śukaśāstrakathoccāre tyājyāste yadi paṇḍitāḥ|| 21

अर्थ

श्रीमद्भागवतके प्रवचनमें ऐसे लोगोंको नियुक्त नहीं करना चाहिये जो पण्डित होनेपर भी अनेक धर्मोंके चक्करमें पड़े हुए, स्त्री-लम्पट एवं पाखण्डके प्रचारक हों॥ २१॥✎ 1271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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