वक्ताके पास ही उसकी सहायताके लिये एक वैसा ही विद्वान् और स्थापित करना चाहिये। वह भी सब प्रकारके संशयोंकी निवृत्ति करनेमें समर्थ और लोगोंको समझानेमें कुशल हो॥ २२॥✎ 1271
वक्तुः पार्श्वे सहायार्थमन्यः स्थाप्यस्तथाविधः।
पण्डितः संशयच्छेत्ता लोकबोधनतत्परः॥ २२
वक्ताके पास ही उसकी सहायताके लिये एक वैसा ही विद्वान् और स्थापित करना चाहिये। वह भी सब प्रकारके संशयोंकी निवृत्ति करनेमें समर्थ और लोगोंको समझानेमें कुशल हो॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 72) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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