श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.30

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

श्रीमद्भागवताख्योऽयं प्रत्यक्षः कृष्ण एव हि।

स्वीकृतोऽसि मया नाथ मुक्‍त्यर्थं भवसागरे॥ ३०

śrīmadbhāgavatākhyo'yaṃ pratyakṣaḥ kṛṣṇa eva hi|

svīkṛto'si mayā nātha muktyarthaṃ bhavasāgare|| 30

अर्थ

‘श्रीमद्भागवतके रूपमें आप साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र ही विराजमान हैं। नाथ! मैंने भवसागरसे छुटकारा पानेके लिये आपकी शरण ली है॥ ३०॥

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