श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.31

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

मनोरथो मदीयोऽयं सफलः सर्वथा त्वया।

निर्विघ्नेनैव कर्तव्यो दासोऽहं तव केशव॥ ३१

manoratho madīyo'yaṃ saphalaḥ sarvathā tvayā|

nirvighnenaiva kartavyo dāso'haṃ tava keśava|| 31

अर्थ

मेरा यह मनोरथ आप बिना किसी विघ्न-बाधाके सांगोपांग पूरा करें। केशव! मैं आपका दास हूँ’॥ ३१॥

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