कथामें विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणोंको और वरण करे; वे द्वादशाक्षर मन्त्रद्वारा भगवान्के नामोंका जप करें॥ ३५॥✎ 1570
वरणं पञ्चविप्राणां कथाभङ्गनिवृत्तये।
कर्तव्यं तैर्हरेर्जाप्यं द्वादशाक्षरविद्यया॥ ३५
कथामें विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणोंको और वरण करे; वे द्वादशाक्षर मन्त्रद्वारा भगवान्के नामोंका जप करें॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)