श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ब्राह्मणान् वैष्णवांश्चान्यांस्तथा कीर्तनकारिणः।

नत्वा सम्पूज्य दत्ताज्ञः स्वयमासनमाविशेत्॥ ३६

brāhmaṇān vaiṣṇavāṃścānyāṃstathā kīrtanakāriṇaḥ|

natvā sampūjya dattājñaḥ svayamāsanamāviśet|| 36

अर्थ

फिर ब्राह्मण, अन्य विष्णुभक्त एवं कीर्तन करनेवालोंको नमस्कार करके उनकी पूजा करे और उनकी आज्ञा पाकर स्वयं भी आसनपर बैठ जाय॥ ३६॥✎ 1570

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1570 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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