श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.55

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अकिञ्चनेषु भक्तेषु प्रायो नोद्यापनाग्रहः।

श्रवणेनैव पूतास्ते निष्कामा वैष्णवा यतः॥ ५५

akiñcaneṣu bhakteṣu prāyo nodyāpanāgrahaḥ|

śravaṇenaiva pūtāste niṣkāmā vaiṣṇavā yataḥ|| 55

अर्थ

किन्तु जो भगवान्‌के अकिंचन भक्त हैं, उनके लिये उद्यापनका कोई आग्रह नहीं है। वे श्रवणसे ही पवित्र हैं; क्योंकि वे तो निष्काम भगवद्भक्त हैं॥ ५५॥

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