॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.67
आचार्याय सुधीर्दत्त्वा मुक्तः स्याद्भवबन्धनैः।
एवं कृते विधाने च सर्वपापनिवारणे॥ ६७
ācāryāya sudhīrdattvā muktaḥ syādbhavabandhanaiḥ|
evaṃ kṛte vidhāne ca sarvapāpanivāraṇe|| 67
अर्थ
यों करनेसे वह बुद्धिमान् दाता जन्म-मरणके बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है। यह सप्ताहपारायणकी विधि सब पापोंकी निवृत्ति करनेवाली है। इसका इस प्रकार ठीक-ठीक पालन करनेसे यह मंगलमय भागवतपुराण अभीष्ट फल प्रदान करता है तथा अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष—चारोंकी प्राप्तिका साधन हो जाता है—इसमें सन्देह नहीं॥ ६७-६८॥