॥ श्रीहरिः ॥
एवं ब्रुवति वै तत्र नारदे वैष्णवोत्तमे।
परिभ्रमन् समायातः शुको योगेश्वरस्तदा॥ ७७
evaṃ bruvati vai tatra nārade vaiṣṇavottame|
paribhraman samāyātaḥ śuko yogeśvarastadā|| 77
अर्थ
सूतजी कहते हैं—शौनकजी! वैष्णवश्रेष्ठ नारदजी यों कह ही रहे थे कि वहाँ घूमते-फिरते योगेश्वर शुकदेवजी आ गये॥ ७७॥
एवं ब्रुवति वै तत्र नारदे वैष्णवोत्तमे।
परिभ्रमन् समायातः शुको योगेश्वरस्तदा॥ ७७
सूतजी कहते हैं—शौनकजी! वैष्णवश्रेष्ठ नारदजी यों कह ही रहे थे कि वहाँ घूमते-फिरते योगेश्वर शुकदेवजी आ गये॥ ७७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.77 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 77) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/77/