श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.77

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सूत उवाच

एवं ब्रुवति वै तत्र नारदे वैष्णवोत्तमे।

परिभ्रमन् समायातः शुको योगेश्‍वरस्तदा॥ ७७

evaṃ bruvati vai tatra nārade vaiṣṇavottame|

paribhraman samāyātaḥ śuko yogeśvarastadā|| 77

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! वैष्णवश्रेष्ठ नारदजी यों कह ही रहे थे कि वहाँ घूमते-फिरते योगेश्‍वर शुकदेवजी आ गये॥ ७७॥

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