श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.78

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तत्राययौ षोडशवार्षिकस्तदा व्यासात्मजो ज्ञानमहाब्धिचन्द्रमाः।

कथावसाने निजलाभपूर्णः प्रेम्णा पठन् भागवतं शनैः शनैः॥ ७८

tatrāyayau ṣoḍaśavārṣikastadā vyāsātmajo jñānamahābdhicandramāḥ|

kathāvasāne nijalābhapūrṇaḥ premṇā paṭhan bhāgavataṃ śanaiḥ śanaiḥ|| 78

अर्थ

कथा समाप्त होते ही व्यासनन्दन श्रीशुकदेवजी वहाँ पधारे। सोलह वर्षकी-सी आयु, आत्मलाभसे पूर्ण, ज्ञानरूपी महा-सागरका संवर्धन करनेके लिये चन्द्रमाके समान वे प्रेमसे धीरे-धीरे श्रीमद्भागवतका पाठ कर रहे थे॥ ७८॥

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