श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.91

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

भक्तिः सुताभ्यां सह रक्षिता सा शास्त्रे स्वकीयेऽपि तदा शुकेन।

अतो हरिर्भागवतस्य सेवनाच्चित्तं समायाति हि वैष्णवानाम्॥ ९१✎ 1502

bhaktiḥ sutābhyāṃ saha rakṣitā sā śāstre svakīye'pi tadā śukena|

ato harirbhāgavatasya sevanāccittaṃ samāyāti hi vaiṣṇavānām|| 91

अर्थ

उस समय शुकदेवजीने भक्तिको उसके पुत्रोंसहित अपने शास्त्रमें स्थापित कर दिया। इसीसे भागवतका सेवन करनेसे श्रीहरि वैष्णवोंके हृदयमें आ विराजते हैं॥ ९१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1502 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सेवना- च्चित्तं → सेवनाच्चित्तं

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