अतो हरिर्भागवतस्य सेवनाच्चित्तं समायाति हि वैष्णवानाम्॥ ९१✎ 1502
bhaktiḥ sutābhyāṃ saha rakṣitā sā śāstre svakīye'pi tadā śukena|
ato harirbhāgavatasya sevanāccittaṃ samāyāti hi vaiṣṇavānām|| 91
अर्थ
उस समय शुकदेवजीने भक्तिको उसके पुत्रोंसहित अपने शास्त्रमें स्थापित कर दिया। इसीसे भागवतका सेवन करनेसे श्रीहरि वैष्णवोंके हृदयमें आ विराजते हैं॥ ९१॥
भक्तिः सुताभ्यां सह रक्षिता सा शास्त्रे स्वकीयेऽपि तदा शुकेन।
अतो हरिर्भागवतस्य सेवनाच्चित्तं समायाति हि वैष्णवानाम्॥ ९१
उस समय शुकदेवजीने भक्तिको उसके पुत्रोंसहित अपने शास्त्रमें स्थापित कर दिया। इसीसे भागवतका सेवन करनेसे श्रीहरि वैष्णवोंके हृदयमें आ विराजते हैं॥ ९१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.91 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 79) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/91/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)