॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.92
दारिद्र्यदुःखज्वरदाहितानां मायापिशाचीपरिमर्दितानाम् ।
संसारसिन्धौ परिपातितानां क्षेमाय वै भागवतं प्रगर्जति॥ ९२
dāridryaduḥkhajvaradāhitānāṃ māyāpiśācīparimarditānām |
saṃsārasindhau paripātitānāṃ kṣemāya vai bhāgavataṃ pragarjati|| 92
अर्थ
जो लोग दरिद्रताके दुःखज्वरकी ज्वालासे दग्ध हो रहे हैं, जिन्हें माया-पिशाचीने रौंद डाला है तथा जो संसारसमुद्रमें डूब रहे हैं, उनका कल्याण करनेके लिये श्रीमद्भागवत सिंहनाद कर रहा है॥ ९२॥