śuddhe śucau navamyāṃ ca dhenujo'kathayatkathām|| 95
अर्थ
राजा परीक्षित्के कथा सुननेके बाद कलियुगके दो सौ वर्ष बीत जानेपर आषाढ़ मासकी शुक्ला नवमीको गोकर्णजीने यह कथा सुनायी थी॥ ९५॥
परीक्षिच्छ्रवणान्ते च कलौ वर्षशतद्वये।
शुद्धे शुचौ नवम्यां च धेनुजोऽकथयत्कथाम्॥ ९५
राजा परीक्षित्के कथा सुननेके बाद कलियुगके दो सौ वर्ष बीत जानेपर आषाढ़ मासकी शुक्ला नवमीको गोकर्णजीने यह कथा सुनायी थी॥ ९५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.95 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 79) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/95/