श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तस्मिन् नन्दात्मजः कृष्णः सदानन्दांगविग्रहः।

आत्मारामश्‍चाप्तकामः प्रेमाक्तैरनुभूयते॥ २१

tasmin nandātmajaḥ kṛṣṇaḥ sadānandāṃgavigrahaḥ|

ātmārāmaścāptakāmaḥ premāktairanubhūyate|| 21

अर्थ

इस परब्रह्मस्वरूप व्रजधाममें नन्दनन्दन भगवान् श्रीकृष्णका निवास है। उनका एक-एक अंग सच्चिदानन्दस्वरूप है। वे आत्माराम और आप्तकाम हैं। प्रेमरसमें डूबे हुए रसिकजन ही उनका अनुभव करते हैं॥ २१॥

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