श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यदा लक्ष्मीः स्वयं वक्त्री विष्णुश्‍च श्रवणे रतः।

मासद्वयं रसास्वादस्तदातीव सुशोभते॥ ३६

yadā lakṣmīḥ svayaṃ vaktrī viṣṇuśca śravaṇe rataḥ|

māsadvayaṃ rasāsvādastadātīva suśobhate|| 36

अर्थ

किन्तु जब लक्ष्मीजी स्वयं वक्ता होती हैं और विष्णु श्रोता बनकर सुनते हैं, तब भागवतकथाका रसास्वादन दो मासतक होता रहता है; उस समय कथा बड़ी सुन्दर, बहुत ही रुचिकर होती है॥ ३६॥

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