श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.27

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तामसं यत्तु वर्षेण सालसं श्रद्धया युतम्।

विस्मृतिस्मृतिसंयुक्तं सेवनं तच्च सौख्यदम्॥ २७

tāmasaṃ yattu varṣeṇa sālasaṃ śraddhayā yutam|

vismṛtismṛtisaṃyuktaṃ sevanaṃ tacca saukhyadam|| 27

अर्थ

तामस सेवन वह है जो कभी भूलसे छोड़ दिया जाय और याद आनेपर फिर आरम्भ कर दिया जाय, इस प्रकार एक वर्षतक आलस्य और अश्रद्धाके साथ चलाया जाय। यह ‘तामस’ सेवन भी न करनेकी अपेक्षा अच्छा और सुख ही देनेवाला है॥ २७॥

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