परन्तु रोहिणीके पुकारनेपर भी वे आये नहीं; क्योंकि उनका मन खेलमें लग गया था। जब बुलानेपर भी वे दोनों बालक नहीं आये, तब रोहिणीजीने वात्सल्यस्नेहमयी यशोदाजीको भेजा॥ १३॥✎ 1413
नोपेयातां यदाऽऽहूतौ क्रीडासंगेन पुत्रकौ।
यशोदां प्रेषयामास रोहिणी पुत्रवत्सलाम्॥ १३
परन्तु रोहिणीके पुकारनेपर भी वे आये नहीं; क्योंकि उनका मन खेलमें लग गया था। जब बुलानेपर भी वे दोनों बालक नहीं आये, तब रोहिणीजीने वात्सल्यस्नेहमयी यशोदाजीको भेजा॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 197) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)