श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नोपेयातां यदाऽऽहूतौ क्रीडासंगेन पुत्रकौ।

यशोदां प्रेषयामास रोहिणी पुत्रवत्सलाम्॥ १३

nopeyātāṃ yadā''hūtau krīḍāsaṃgena putrakau|

yaśodāṃ preṣayāmāsa rohiṇī putravatsalām|| 13

अर्थ

परन्तु रोहिणीके पुकारनेपर भी वे आये नहीं; क्योंकि उनका मन खेलमें लग गया था। जब बुलानेपर भी वे दोनों बालक नहीं आये, तब रोहिणीजीने वात्सल्यस्नेहमयी यशोदाजीको भेजा॥ १३॥✎ 1413

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1413 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँका → माका

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