श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

ततः प्रवयसो गोपास्तोकाश्‍लेषसुनिर्वृताः।

कृच्छ्राच्छनैरपगतास्तदनुस्मृत्युदश्रवः ॥ ३४

tataḥ pravayaso gopāstokāśleṣasunirvṛtāḥ|

kṛcchrācchanairapagatāstadanusmṛtyudaśravaḥ || 34

अर्थ

बूढ़े गोपोंको अपने बालकोंके आलिंगनसे परम आनन्द प्राप्त हुआ। वे निहाल हो गये। फिर बड़े कष्टसे उन्हें छोड़कर धीरे-धीरे वहाँसे गये। जानेके बाद भी बालकोंके और उनके आलिंगनके स्मरणसे उनके नेत्रोंसे प्रेमके आँसू बहते रहे॥ ३४॥

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