श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.51

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

आत्मादिस्तम्बपर्यन्तैर्मूर्तिमद्भिश्‍चराचरैः ।

नृत्यगीताद्यनेकार्हैः पृथक् पृथगुपासिताः॥ ५१

ātmādistambaparyantairmūrtimadbhiścarācaraiḥ |

nṛtyagītādyanekārhaiḥ pṛthak pṛthagupāsitāḥ|| 51

अर्थ

ब्रह्माजीने यह भी देखा कि उन्हींके-जैसे दूसरे ब्रह्मासे लेकर तृणतक सभी चराचर जीव मूर्तिमान् होकर नाचते-गाते अनेक प्रकारकी पूजा-सामग्रीसे अलग-अलग भगवान्‌के उन सब रूपोंकी उपासना कर रहे हैं॥ ५१॥✎ 1661

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1661 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भक्त-जनोंके → भक्तजनोंके

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