श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.52

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अणिमाद्यैर्महिमभिरजाद्याभिर्विभूतिभिः ।

चतुर्विंशतिभिस्तत्त्वैः परीता महदादिभिः॥ ५२

aṇimādyairmahimabhirajādyābhirvibhūtibhiḥ |

caturviṃśatibhistattvaiḥ parītā mahadādibhiḥ|| 52

अर्थ

उन्हें अलग-अलग अणिमा-महिमा आदि सिद्धियाँ, माया-विद्या आदि विभूतियाँ और महत्तत्त्व आदि चौबीसों तत्त्व चारों ओरसे घेरे हुए हैं॥ ५२॥✎ 1925

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1925 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): एक-रस → एकरस

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